
महाराष्ट्र की अमरावती महानगरपालिका में हुआ मेयर चुनाव अचानक सियासी हलकों का सबसे गर्म टॉपिक बन गया। वजह साफ है यह चुनाव न सिर्फ नतीजों से, बल्कि अप्रत्याशित समर्थन और अचानक बदले समीकरणों से चर्चा में आ गया।
जिस समर्थन की किसी ने कल्पना तक नहीं की थी, वही आखिरकार मेयर की कुर्सी तक पहुंचने की चाबी बन गया।
AIMIM से BJP तक: वोट ने बदली पूरी तस्वीर
मेयर चुनाव के दौरान सबसे बड़ा राजनीतिक झटका तब लगा, जब AIMIM की पार्षद मीरा कांबले, जिन्हें BJP की मुखर आलोचक माना जाता था, उन्होंने आखिरी क्षणों में BJP प्रत्याशी श्रीचंद तेजवानी के समर्थन का ऐलान कर दिया।
इस एक फैसले ने पूरा चुनावी गणित पलट दिया। नतीजा — BJP उम्मीदवार श्रीचंद तेजवानी अमरावती के नए मेयर चुन लिए गए।
राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर एक ही चर्चा रही “यह वोट था या सियासत का मास्टरस्ट्रोक?”
Shrichand Tejwani बने Amravati के नए Mayor
BJP के Shrichand Tejwani की जीत सिर्फ एक पद की जीत नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे स्थानीय राजनीति में BJP की रणनीतिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि यह जीत दिखाती है कि नगर निगम की राजनीति अब केवल पार्टी लाइन पर नहीं चल रही, बल्कि पर्सनल समीकरण और आखिरी वक्त के फैसले भी बड़ा रोल निभा रहे हैं।
AIMIM का सख्त एक्शन: मीरा कांबले निष्कासित
मीरा कांबले के फैसले के बाद AIMIM ने बिना देर किए सख्त रुख अपनाया। पार्टी नेतृत्व ने साफ कहा कि “यह कदम पार्टी की नीति, विचारधारा और अनुशासन के खिलाफ है।”
इसी के साथ मीरा कांबले को AIMIM से निष्कासित कर दिया गया। पार्टी ने यह भी संकेत दिया कि अनुशासन से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह फैसला AIMIM के कोर वोटबेस को संदेश देने के लिए भी अहम था।
विचारधारा या वोट की गणित?
अमरावती का यह चुनाव एक बार फिर यह सवाल छोड़ गया क्या नगर निगम की राजनीति में विचारधारा स्थायी होती है?
आज विरोधी, कल समर्थक और परसों निष्कासन। सियासत शायद यही कहती है “यहां स्थायी कुछ भी नहीं, सिवाय कुर्सी के।”
Deputy Mayor Election: Sachin Bhende की जीत
मेयर चुनाव के साथ-साथ हुए उपमहापौर चुनाव में भी दिलचस्प नतीजा सामने आया। युवा स्वाभिमान पार्टी के सचिन भेंडे ने जीत दर्ज की और वे अमरावती के नए Deputy Mayor चुने गए। इससे साफ है कि नगर निगम में सत्ता का संतुलन अब एक ही पार्टी तक सीमित नहीं रह गया है।
Amravati Politics: आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP को इससे मनोवैज्ञानिक बढ़त मिली है। AIMIM अपने संगठन को और सख्त कर सकती है। अन्य दल अब क्रॉस-वोटिंग पर ज्यादा नजर रखेंगे। अमरावती का यह चुनाव आने वाले नगर निकाय चुनावों के लिए एक ट्रेलर माना जा रहा है।
एक वोट, कई संदेश
अमरावती मेयर चुनाव ने यह साबित कर दिया कि स्थानीय राजनीति में एक वोट भी सत्ता की दिशा बदल सकता है। आज यह चुनाव नहीं, कल की राजनीति की पटकथा लिख रहा है।
Silent Exile? Epstein Files के बीच Prince Andrew का Sandringham Shift
