रूस डिस्काउंट आउट, अमेरिका इन! अब पेट्रोल पंप पर कितना बढ़ेगा बिल?

अमित मित्तल
अमित मित्तल

सोमवार को भारत और अमेरिका के बीच हुई नई ट्रेड डील को रणनीतिक जीत बताया जा रहा है, लेकिन आम आदमी के लिए असली सवाल एक ही है क्या अब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे?

अब तक भारत रूस से भारी छूट पर कच्चा तेल खरीद रहा था। यही सस्ता रूसी तेल महंगाई के दौर में भारत के लिए बड़ा सहारा बना। लेकिन नई डील के बाद तस्वीर बदलती दिख रही है—अब भारत का फोकस अमेरिकी तेल पर होगा।

Short Term Impact: हल्की महंगाई का डर

शॉर्ट टर्म में असर थोड़ा चुभ सकता है। अमेरिका से मिलने वाला कच्चा तेल आमतौर पर रूस के डिस्काउंटेड ऑयल से महंगा होता है। ऊपर से लंबी दूरी की शिपिंग, इंश्योरेंस और लॉजिस्टिक्स जोड़ दें, तो भारत पहुंचते-पहुंचते तेल की landing cost बढ़ जाती है।

इसी वजह से पेट्रोल-डीजल पर 2 से 3 रुपये प्रति लीटर तक का दबाव बन सकता है। हालांकि यह बढ़ोतरी तुरंत हो, ऐसा जरूरी नहीं। तेल के दाम WhatsApp फॉरवर्ड की तरह नहीं बढ़ते—यहां बैरल, बजट और राजनीति तीनों साथ चलते हैं।

Long Term Impact: Stability का फायदा

लॉन्ग टर्म में तस्वीर उतनी नेगेटिव नहीं है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, यानी सप्लाई की भरोसेमंद गारंटी मिलती है। रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच यह भारत के लिए बड़ा प्लस है।

इसके अलावा, अगर इस ट्रेड डील से रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होता है (जैसा कि हाल में करीब 40 पैसे की मजबूती दिखी), तो महंगे तेल का असर काफी हद तक neutralize हो सकता है।

Refinery Friendly American Oil

एक और फायदा तकनीकी है। भारतीय रिफाइनरियां अमेरिकी Light Sweet Crude को प्रोसेस करने के लिए पहले से अच्छी तरह तैयार हैं। इससे रिफाइनिंग आसान, प्रोसेसिंग कॉस्ट कम, लॉन्ग टर्म में प्राइस पर कंट्रोल संभव।

सरकार तुरंत दाम क्यों नहीं बढ़ाएगी?

बजट 2026 के ठीक बाद सरकार शायद ही जनता को महंगाई का झटका देना चाहे। इसीलिए शॉर्ट टर्म में कीमतें stable रखी जा सकती हैं।लेकिन अगर इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम चढ़ते हैं, तो रूस के सस्ते तेल की कमी धीरे-धीरे आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है।

LNG Deal का बोनस

इस डील में भारत ने अमेरिका से LNG (Liquefied Natural Gas) खरीदने का भी बड़ा वादा किया है। इसका सीधा फायदा यह हो सकता है कि CNG, PNG (पाइप वाली रसोई गैस) की कीमतें आने वाले समय में ज्यादा stable रहें।

Visa Rules: यहां कोई राहत नहीं

जहां ट्रेड डील में टैरिफ घटे हैं, वहीं वीज़ा नियमों पर अमेरिका का रुख सख्त बना हुआ है। 2 फरवरी 2026 की डील के बाद भी स्टूडेंट वीजा, वर्क वीजा को लेकर किसी नरमी का ऐलान नहीं हुआ।

7 जनवरी 2026 को अमेरिकी दूतावास पहले ही साफ चेतावनी दे चुका है अमेरिकी कानून तोड़ने पर वीज़ा रद्द और डिपोर्टेशन तय है।
अब वीजा इंटरव्यू से पहले सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच भी की जा सकती है।

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