
कश्मीर घाटी में आतंक का नेटवर्क सिर्फ बंदूक से नहीं, कनेक्शन से चलता है—और इसी कड़ी को तोड़ने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को बड़ा एक्शन लिया।
उत्तर कश्मीर के सोपोर, बांदीपोरा, रफियाबाद और श्रीनगर में एकसाथ छह ठिकानों पर छापेमारी कर NIA ने साफ संकेत दे दिया है कि अब सिर्फ फायरिंग नहीं, फाइनेंस, लॉजिस्टिक्स और सपोर्ट सिस्टम भी निशाने पर है।
कहां-कहां हुई रेड? पूरा मैप समझिए
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, NIA की टीमें स्थानीय पुलिस के सहयोग से उन रिहायशी परिसरों तक पहुंचीं, जिनका नाम पहले से ही संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ चुका था।
बांदीपोरा
यहां एक सेवानिवृत्त शिक्षक के घर छापा मारा गया। खास बात यह है कि उनका बेटा पहले से ही UAPA के तहत हिरासत में है—यानी शक की सुई सीधे नेटवर्क तक।
रफियाबाद (बारामूला)
डांगीवाचा थाना क्षेत्र में कृषि विभाग के एक सरकारी कर्मचारी के आवास पर तलाशी हुई। सवाल सीधा है— क्या सिस्टम के भीतर से ही आतंक को ऑक्सीजन मिल रही थी?
सोपोर और श्रीनगर
यहां डिजिटल ट्रेल पर खास फोकस रहा। मोबाइल, लैपटॉप, दस्तावेज—हर उस चीज़ की जांच हुई जो हाइब्रिड आतंकी मॉड्यूल की पोल खोल सकती है।
गिरफ्तारी नहीं, लेकिन बड़ा गेम प्लान
फिलहाल किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन NIA सूत्र साफ कहते हैं, “यह रेड किसी एक नाम के लिए नहीं, पूरे आतंकी इकोसिस्टम की जड़ तक पहुंचने के लिए है।”
मतलब साफ है, आज तलाशी, कल नेटवर्क एक्सपोज़।

LeT–JeM लिंक पर क्यों बढ़ी सख्ती?
हाल के इनपुट्स में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े हाइब्रिड ऑपरेटर्स की भूमिका सामने आई है।
ये वही मॉडल है जिसमें, बंदूक कोई और चलाता है। पैसा कोई और देता है। जानकारी कोई तीसरा पास करता है। और सब ‘आम चेहरे’ के पीछे छुपे रहते हैं।
कश्मीर में अब सवाल यह नहीं है कि “आतंकी कहां है?” सवाल यह है कि “उसे सपोर्ट कौन कर रहा है?” NIA की यह कार्रवाई बताती है कि अब जांच पोस्टर बॉय नहीं, बैकएंड प्लेयर्स पर फोकस कर रही है।
कई जगहों पर तलाशी अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में नए खुलासे डिजिटल एविडेंस और बड़े नाम सामने आने की पूरी संभावना है।
एक बात तय है, कश्मीर में आतंक का ‘Silent Network’ अब ज्यादा दिन साइलेंट नहीं रहेगा।
Peace Talks On TV, Bombs On Ground! गाजा में फिर खून
