
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर 24 परगना में आयोजित भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन में पहले आनंदपुर गोदाम अग्निकांड में मारे गए मजदूरों को श्रद्धांजलि दी—और फिर सीधे ममता बनर्जी सरकार पर हमला बोल दिया।
शाह के शब्दों में यह घटना “हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और सत्ता की मिलीभगत” का नतीजा है।
“मोमो फैक्ट्री में किसका पैसा जमा था?”
अमित शाह ने मंच से वो सवाल पूछे, जिनका जवाब अब तक फाइलों में भी नहीं मिला। फैक्ट्री में रखा पैसा किसका था? मालिक ने किन रसूखदारों के साथ विदेश यात्राएं कीं? इतने दिन बाद भी मालिक की गिरफ्तारी क्यों नहीं?
यह सवाल सिर्फ आग को लेकर नहीं थे—पूरे governance मॉडल पर आरोप थे।
32 घंटे की चुप्पी: संवेदनहीनता या रणनीति?
शाह ने तंज कसते हुए कहा कि मजदूरों की चीखें 32 घंटे तक सुनाई देती रहीं, लेकिन सरकार तब तक खामोश रही। 25 मौतें, 27 लोग लापताऔर प्रशासनिक प्रतिक्रिया देर से।
राजनीतिक भाषा में कहें तो “जब संवेदनशीलता मर जाती है, तब प्रेस नोट जिंदा रहते हैं।”
‘वोट बैंक बनाम बंगाल की अस्मिता’
अमित शाह ने ममता सरकार पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं पर पुलिसिया कार्रवाई हुई। पीड़ित परिवारों तक पहुंचने से रोका गया। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ का जिक्र करते हुए कहा कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान पर ही सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा पर सीधा वार
गृह मंत्री ने अवैध घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बताया और कलकत्ता हाईकोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार BSF को सहयोग नहीं कर रही।
उन्होंने दावा किया कि “BJP सरकार बनते ही 35 दिन में सीमा पर बाड़ खड़ी कर दी जाएगी—चाहे सहयोग मिले या नहीं।”
सियासी गणित: आंकड़ों के सहारे आत्मविश्वास
अमित शाह ने BJP की बढ़ती ताकत गिनाते हुए कहा:
- 2014: 2 सीटें
- 2019: 18 सीटें
- 2021: 77 विधानसभा सीटें
दावा—इस बार 50% से ज्यादा सीटें और सत्ता।
कोलकाता का अग्निकांड अब सिर्फ प्रशासनिक फाइल नहीं रहा। यह मामला भ्रष्टाचार, जवाबदेही और सत्ता की नैतिकता पर खुली बहस बन चुका है।
सवाल वही है आग लगी कैसे, और बुझाई क्यों नहीं गई?
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