
असम विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दौरा सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि साफ़ तौर पर political signal माना जा रहा है।
एक तरफ मंच से विकास परियोजनाओं की झड़ी लगी, तो दूसरी तरफ NDA के भीतर seat sharing और election strategy पर गंभीर मंथन हुआ।
यानी संदेश साफ था— काम भी दिखाना है, और गठबंधन भी संभालना है।
₹1,715 करोड़ की Development Politics
अमित शाह ने डिब्रूगढ़ समेत कई इलाकों में करीब 1,715 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें शामिल हैं- नया विधायक परिसर, , Advanced Sports Complex, Wildlife Health & Research Centre
चुनाव से पहले विकास की यह टाइमिंग बताती है कि BJP narrative साफ है— “काम बोलता है, वोट खुद आता है।”
Strategy Room में क्या चला?
दौरे के दौरान शाह ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बंद कमरे में assembly election roadmap पर चर्चा की। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में BJP इस बार बड़ा दावा कर रही है— 126 में से 100+ सीटें जीतने का लक्ष्य। यानी यह चुनाव सिर्फ जीत का नहीं, बल्कि dominance का है।
BJP कितनी सीटों पर लड़ेगी?
सूत्रों के मुताबिक BJP खुद 95 से 100 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। बाकी सीटों पर NDA सहयोगियों से बातचीत जारी है। हालांकि UPPL और BPF के बीच मतभेद NDA के लिए चुनौती बने हुए हैं।
ऐसे में अमित शाह का यह दौरा damage control + consensus building दोनों के रूप में देखा जा रहा है।

गठबंधन में दोस्ती स्थायी नहीं होती, सीटें तय करती हैं रिश्तों की उम्र। और चुनाव से पहले हर “सहयोगी” अचानक “ज़रूरी” हो जाता है।
Cultural Card और Ground गेम
अमित शाह ने धेमाजी जिले में मिशिंग जनजाति के युवाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। साथ ही BJP core committee की बैठक में उन्होंने booth-level activation पर ज़ोर दिया।
पार्टी का फोकस साफ है घुसपैठ पर सख्त रुख, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण (जैसे बटद्रवा थान का विकास), कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के प्रभाव को सीमित करना।
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