“H-1B वीजा पर ट्रंप का यू-टर्न– Desi Talent के बिना नहीं चलता America!”

Jyoti Atmaram Ghag
Jyoti Atmaram Ghag

जो ट्रंप कभी H1B वीजा को अमेरिका के लिए “खतरा” बताते थे, अब वही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे “आवश्यक” कह रहे हैं।
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने माना कि – “अमेरिका में टैलेंटेड वर्कर्स की भारी कमी है, और H-1B वीजा धारक इस कमी को पूरा करते हैं।”

यानी अब Made in USA भी Trained in India के बिना अधूरा लग रहा है!

88 लाख की फीस लेकिन फिर भी ज़रूरी बताया वीजा को

कुछ महीने पहले ही ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा फीस को दोगुना नहीं बल्कि साठ गुना बढ़ा दिया था — $1,500 से सीधे $100,000 (करीब ₹88 लाख) तक।
अब ट्रंप ने खुद कहा कि यह वीजा अमेरिका की तकनीकी और औद्योगिक जरूरतों के लिए अहम है।

“हमारे पास बहुत से बेरोजगार अमेरिकी हैं, पर जरूरी स्किल नहीं हैं,” – ट्रंप

भारतीयों पर सबसे बड़ा असर, पर उम्मीद भी जगी

H1B वीजा का सबसे बड़ा लाभ उठाने वाला देश भारत है। हर साल मिलने वाले नए वीज़ा में 70% भारतीयों को मिलता है। चीनी नागरिकों का हिस्सा केवल 11-12% के आसपास है। ट्रंप के इस “नरम बयान” से अब उम्मीद है कि भविष्य में वीजा फीस कम की जा सकती है या नई छूट लागू हो सकती है।
भारतीय IT कंपनियों और इंजीनियरों के लिए यह खबर कोड से ज्यादा पावरफुल सिग्नल है!

ट्रंप बोले – “टैलेंट ट्रेनिंग से नहीं, टाइम से आता है”

जब उनसे पूछा गया कि क्या H1B सुधार उनकी प्राथमिकता है, तो ट्रंप ने कहा:

“मैं सहमत हूं, लेकिन आपको ये टैलेंट भी लाना होगा। आप किसी बेरोजगार को मिसाइल फैक्ट्री में नहीं बैठा सकते।”

उन्होंने जॉर्जिया राज्य का उदाहरण दिया — “जब कुशल विदेशी वर्कर्स हटाए गए, तब बैटरियां बनना तक मुश्किल हो गया।”

मतलब अब ट्रंप भी मान गए कि Google, Tesla और AI Labs जैसे प्रोजेक्ट्स सिर्फ ‘Hire American’ से नहीं चल सकते।

वीजा नियमों का इतिहास: विरोध से स्वीकार्यता तक का सफर

सितंबर 2024 में ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा पर बड़े पैमाने पर बदलाव किए थे —

  • फीस: $1,500 → $100,000
  • आवेदन प्रक्रिया: और जटिल
  • ड्यूल अप्रूवल नियम: कड़ा किया गया

लेकिन अब उनका यह बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका फिर से ग्लोबल टैलेंट के लिए ओपन हो रहा है।

क्यों बदला ट्रंप का रुख?

अमेरिकी टेक सेक्टर में स्किल गैप 40% से ऊपर है। सिलिकॉन वैली की 60% कंपनियों में विदेशी कर्मचारी हैं। चुनावी माहौल में भारतीय समुदाय का प्रभाव बढ़ा है।

इसलिए, “America First” की जगह अब “America Needs Talent” का दौर शुरू होता दिख रहा है।

पहले ट्रंप बोले – “H1B जॉब्स छीनता है।”
अब बोले – “H1B जॉब्स बचाता है।”
शायद यह वही पल है जब अमेरिका ने भी महसूस किया कि Desi दिमाग = Global Engine! ट्रंप के इस नए रुख से न सिर्फ भारतीय पेशेवरों के लिए उम्मीद की किरण जगी है,
बल्कि यह भी साबित हुआ कि दुनिया का सबसे ताकतवर देश भी बिना भारतीय टैलेंट के अधूरा है।

“From ban to backbone – H1B holders just went from foreign workers to national assets!”

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