“मुसलमानन के वोटवा — कौन तरेला, कौन डूबेला?”

अजमल शाह
अजमल शाह

बिहार में चुनाव बिना मुस्लिम वोट के चर्चा अधूरी रहेला। ई वोट बैंक ना केवल संख्यात्मक रूप से मजबूत बा (लगभग 17%), बलुक रणनीतिक रूप से भी सीटन के भविष्य तय करेला। 2020 में मुस्लिम वोट RJD के साथ ठहरल, बाकिर अब 2025 में सवाल उठल बा — का अबकी बार मुसलमान तेजस्वी के ताज चमकइहें, कि नीतीश-बीजेपी नया गणित बनइहें?”

कहाँ-कहाँ बा मुस्लिम असर

सीवान, किशनगंज, अररिया, कटिहार, भागलपुर, पूर्णिया, मधुबनी, दरभंगा, गोपालगंज — ई इलाका मुस्लिम बहुल ह, जहाँ 30-60% तक वोटर मुस्लिम बा। कुल मिलाकर करीब 55 सीट एह वर्ग से सीधे प्रभावित होखेला। मतलब साफ — ई लोग जइसे वोट डाले, वैसा सरकार बन जाला।

तेजस्वी यादव के उम्मीद — “Secular छवि और Social Justice”

तेजस्वी यादव मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण के पुराना भरोसा ताजा करे में लागल बाड़न। RJD के प्रचार में “संविधान बचावो” अउर “अल्पसंख्यक सुरक्षा” के भावनात्मक अपील बा। मुस्लिम मतदाता के बीच तेजस्वी के छवि “भरोसे वाला नेता” बनल बा, बाकिर युवन में बेरोजगारी अउर स्थानीय मुद्दा भी गूँज रहल बा।

भोजपुरी में कहें त – “तेजस्वी के नाव पर भरोसा बा, बाकिर धक्का मारेला के बानी खोजत।”

नीतीश कुमार — पुरान भरोसा, नया संशय

नीतीश के “समान अवसर” वाला नैरेटिव अब थोड़ा थकान भरा लग रहल बा। पहिले मुस्लिम समाज उनकर “शांत वोटर” रहले, बाकिर भाजपा के साथ गठबंधन से एक हिस्सा असंतुष्ट बा। अब जब JDU फेर से अलग पहचान बनावे के कोशिश करत बा, त मुस्लिम वोट सोचत बा — “विश्वास लौटाई कि नहीं?”

AIMIM — “कटिहार से किलाबंदी”

ओवैसी के पार्टी AIMIM 2020 में सीमांचल में 5 सीट जीत के सबके चौंकवले रही। बाकिर बाद में चार विधायक RJD में चले गइले। अब 2025 में ओवैसी के मकसद साफ बा — सीमांचल में फिर कब्जा जमाव। बाकिर जनता अब पूछत बा — “नेता बदल गइलन, का इरादा भी बदलेला?”

BJP — नया कार्ड “Pasmanda Outreach”

बीजेपी मुस्लिम वोट में सेंध लगावे खातिर “पसमांदा मुस्लिम सम्मेलन” वाला कार्ड खेल रहल बा। लेकिन, बिहार में अभी असर सीमित बा। कुछ लोकल चेहरन (अंसारी, रहमानी समुदाय से) के आगे ला के BJP “Inclusive” दिखावे में लागल बा, बाकिर सवाल बा — “Symbolic Representation से क्या Muslim भरोसा लौटाई?”

कौन लगाई मुस्लिमन के नैया पार?

इस बार मुकाबला “भावनाओं बनाम भरोसे” के बीच बा। तेजस्वी यादव के मुसलमानन में मजबूत पकड़ बा, नीतीश कुमार अब ‘Old Friend’ बन गइल बाड़न, तो ओवैसी सीमांचल में नया एक्सपेरिमेंट कर रहल बाड़न। बाकिर, चुनाव में नाव त ओही पार लागे जवन सही लहर पकड़े।

“अबकी चुनाव में मुसलमान ना भाव से, बल्कि हिसाब से वोट डालिहें।”

“नेता लोग ईद पर सेवइयां खाके फोटो खिंचवावेला, बाकिर वोटिंग के दिन जनता उनकर ‘सेवइयां’ बना देला!”

बिहार 2025 में मुस्लिम वोट बैंक फिर से “किंगमेकर” बनल बा। अगर RJD अपना भरोसा कायम रख लेला, त महागठबंधन के राह आसान होई। बाकिर अगर AIMIM या JDU बीच में सेंध मार देलस, त परिणाम पूरी तरह से “सीमांचल फैक्टर” पर निर्भर कर जाई।

“मुसलमान के वोट अब इमोशन से ना, परफॉर्मेंस से मिले वाला बा।”

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