
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में इस समय एक नया और संवेदनशील मुद्दा गरमा गया है। होटल-ढाबों के नाम विवाद के बाद अब बैंडबाजा व्यवसाय में भी धार्मिक पहचान को लेकर विवाद शुरू हो गया है।
कुछ मुस्लिम संचालकों द्वारा हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर बैंड चलाने को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है।
CM पोर्टल पर पहुंची शिकायत, सीधा मामला पहुंचा योगी सरकार तक
पाकबड़ा निवासी अधिवक्ता शेबी शर्मा ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि 15-20 मुस्लिम संचालक अपने बैंडों का नाम “शिव शक्ति बैंड”, “हनुमान बैंड”, “शिवाय बैंड” जैसे हिंदू धार्मिक नामों पर रखकर संचालन कर रहे हैं।
शिकायत सीधे सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंची, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
SP सिटी ने सभी बैंडबाजा संचालकों को किया तलब, दिए कड़े निर्देश
इस विवाद को गंभीर मानते हुए SP सिटी कुमार रणविजय सिंह ने एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें सभी बैंडबाजा संचालकों को बुलाया गया।
खास तौर से मुस्लिम संचालकों को निर्देश दिए गए कि वे अपने बैंडों से देवी-देवताओं के नाम हटा लें और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से बचें।
संचालकों ने जताई सहमति, कहा- “नाम बदल देंगे”
बैठक में मौजूद अधिकतर संचालकों ने प्रशासन को आश्वासन दिया कि वे जल्द ही अपने बैंड का नाम बदल देंगे और भविष्य में ऐसे किसी भी नाम का प्रयोग नहीं करेंगे जो विवाद को जन्म दे सके।
पुलिस ने भी स्पष्ट किया कि आदेश की अवहेलना पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पहले ढाबों पर उठा था विवाद, अब बैंडबाजा बना अगला टारगेट
यह पहला मामला नहीं है। कांवड़ यात्रा के दौरान मुस्लिम ढाबा मालिकों द्वारा हिंदू नाम रखे जाने पर भी बवाल हो चुका है।
कई जगह नारेबाजी, बहिष्कार और विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। अब वही फॉर्मूला बैंडबाजों पर लागू होता दिख रहा है।
प्रशासन का पक्ष – “व्यवसाय करो, लेकिन पहचान छुपाकर नहीं”
SP सिटी ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यवसाय अपनी धार्मिक पहचान को छुपाकर या दूसरे धर्म के प्रतीकों का इस्तेमाल कर नहीं किया जा सकता।
इससे लोगों की भावनाएं आहत होती हैं और सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है।

सवाल यह है…
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क्या व्यवसाय में नाम रखना अब धार्मिक पहचान का मुद्दा बन चुका है?
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क्या इससे संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा?
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या फिर यह केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण और अस्थायी विवाद है?
जनता दरबार में ज़हर, चिट्ठी और “नंदू टैक्स” का धमाका!
