यूपी के राज्यपाल बीएल जोशी का इस्तीफ़ा


हलो यू पी ( 17 - 06- 2014 ) - राज्यपाल बीएल जोशी अपने यूपी के कार्यकाल में किसी बड़े विवाद में नहीं फंसे। वे विवादों से दूर ही रहे। शायद वे यूपी के पहले राज्यपाल थे जिनको यूपी में ही लगातार दोबारा राज्यपाल बनने का अवसर मिला। वे 28 जुलाई 2009 को यूपी के राज्यपाल बनकर आए। 12 अप्रैल 2012 को उनका कार्यकाल समाप्त हो गया लेकिन उनकी जगह किसी राज्यपाल को नहीं भेजा गया जिससे परंपरा के अनुसार वे राज्यपाल बने रहे। परंपरा यह है कि जब तक कोई नया राज्यपाल नहीं आता, तब तक पुराने राज्यपाल राजभवन नहीं छोड़ते हैं। इसी परंपरा के तहत वे राज्यपाल बने रहे। अंतत: छह मार्च 2014 को उन्हें यूपी का दोबारा राज्यपाल बनाया गया। इससे पहले कि उनका कार्यकाल पूरा होता, केंद्र में यूपीए की जगह एनडीए सरकार आ गई। ऐसी स्थिति में उनका जाना तय माना जा रहा था लेकिन इससे पहले कि एनडीए सरकार उनसे इस्तीफा मांगती, उन्होंने स्वेच्छा से अपने पद से इस्तीफा दे दिया। खास बात यह है कि जोशी कांग्रेस नेतृत्व के अत्यंत करीबी माने जाते हैं। यही वजह रही कि वे लंबे समय तक कई राज्यों के राज्यपाल पद पर आसीन रहे। वे दिल्ली के उप राज्यपाल के साथ-साथ मेघालय और उत्तराखंड के भी राज्यपाल रहे। वे टीवी राजेस्वर के बाद यूपी आए थे, इसलिए उनकी व्यवहार कुशलता लोगों को अच्छी लगी। अन्यथा टीवी राजेस्वर के कार्यकाल में तो राजभवन लोगों के लिए एक तरह से बंद होकर रह गया था।

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